इंदौर नगर निगम में एक और स्कैम : एक संपत्ति के कई खाते

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कर्मचारियों की कमाई का सूत्र बना “नया मालिक नया खाता”

Anil Bagora

इंदौर. ( जनहित मीडिया )। नगर निगम में घोटालों की कमी नहीं है। सैकड़ो करोड़ के घोटालों वाले निगम में एक ही संपत्ति के बार बार नए खाते खोलने का नया स्कैम सामने आया है। राजस्व विभाग के कर्मचारी खुद स्वीकारते हैं कि नोटरी वाले प्लॉट/मकान के मामले में बिकने के बाद नए मालिक का नया खाता खोलना कोई नई बात नहीं है। ऐसे सैकड़ो खाते हैं।

इंदौर नगर निगम में कई दलालों के दल-दल में फंस चुका हैं, ईमानदार कर्मचारियों को काम करने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं, वहंीं निगम मुख्यालय में दलाल खुल्ले आम फर्जी काम कराकर झोन में पदस्थ एआरओ और बिल कलेक्टर को बदनाम कर रहे है, क्योंकि उनके कारण ही रिकार्डतोड़ वसुली हो रही है, लेकिन दलालों के कारण ईमानदा कर्मचारियों को काम करना मुश्किल हो रहा हैं.

अभी हाल ही में नोटरी पर नामांरण का प्रकरण चर्चा में जोरों से है, उसे दबाने का प्रयास उच्चस्तर से हो रहा है, अगर वास्तव में जांच होतो कई निगम कर्मचारी और दलालों के कारनामें बाहर आ सकते है, लेकिन दबाव और ऊपरी कमाई के चलते लिपापोती शुरू हो गई. जो काम झोनस्तर पर होना चाहिए वो काम मुख्यालय में पदस्थ एआरओ बिना जांच पड़ताल के कैसे काम कर रहा है, ईमानदार अफसर और निगम कर्मचारियों की छबि धूमिल कर रहा हैं. जिसकी जांच की जाना चाहिए.

नोटरी से नामांतरण करने का प्रावधान नहीं 

नगर निगम में नोटरी से नामांतरण के मामले में सहायक राजस्व अधिकारी, बिल कलेक्टर और अन्य कई कर्मचारी आधिकारी फंसे हुए हैं। लेकिन यह नगर निगम में अकेला अनोखा घोटाला नहीं है। नोटरी से नामांतरण करने का प्रावधान नहीं होने के कारण यह लोग फंसे हैं लेकिन नोटरी वाली संपत्तियों का नया खाता खोलना कोई नई बात नहीं है।

 दो या उससे भी अधिक खाते खुले 

शहर में सैकड़ो ऐसी संपत्तियां हैं जिनके दो या उससे भी अधिक खाते खुले हुए हैं। नोटरी वाले मकान या प्लॉट बिकने पर नामांतरण नहीं होने की स्थिति में बिल कलेक्टर और एआरओ ( सहायक राजस्व अधिकारी ) नया खाता खोल रहे हैं। नोटरी वाले मकान बिकने के बाद नए मकान मालिक का नया खाता खोलना कोई नई बात नहीं है। इंदौर नगर निगम के सभी झोन में कई वर्षों से यह क्रम चल रहा है और सैकड़ो नोटरियों वाली संपत्तियों के दो तीन या इससे भी अधिक खाता खुल चुके हैं। नोटरी से नामांतरण नहीं होने के कारण पुराना खाता में छोड़कर नया खाता खोला जाता है।

क्या सॉफ्टवेयर नहीं बताता पुराना खाता ?

नगर निगम के सारे काम ऑनलाइन होते हैं ऐसी स्थिति में किसी भी संपत्ति का एड्रेस डालने पर उसकी पूर्व की जानकारी सामने आ जाती है। ऐसे में किसी भी संपत्ति का नया संपत्ति कर खाता कैसे खोला जा सकता है, लेकिन बिल कलेक्टर और एआरओ वर्षों से यह कर रहे हैं और सैकड़ो खाते खोल चुके हैं।संचार व मीडिया अध्ययन

झोन 17 में सामने आया मामला : हाल ही में झोन 17 के वार्ड 18 में एक प्लॉट को लेकर हुए विवाद में प्लॉट पर कब्जा करने के लिए दूसरा खाता खुलवा लिया। जब प्लॉट मालिक ने जानकारी निकलवाई तो पता चला पिछले साल उनके प्लॉट का नया खाता खुल गया है, जबकि 3o वर्ष से प्लॉट के मालिक है और उनका संपत्ति कर का खाता भी पुराना है। बावजूद इसके नया खाता खुल गया है।

जांच हो तो खुलेगा चिट्ठा : एक ही संपत्ति के एक से अधिक खाता खोलने के मामले में बारीकी से जांच करवाई जाए तो नगर निगम में एक बड़ा घोटाला उजागर होगा। बारीकी से जांच हो तो  कई जद में आएंगे।

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