भोपाल. जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत नियमों को सख्त बनाया गया है। यदि कोई जनगणना अधिकारी या इस कार्य के लिए अधिकृत व्यक्ति काम करने से मना करता है, ड्यूटी में बाधा डालता है या किसी भी तरह की रुकावट पैदा करता है, तो उस पर ₹1000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति को 3 साल तक की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
आगामी बुधवार यानी 31 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाओं को आधिकारिक तौर पर 'फ्रीज' कर दिया जाएगा। इसकी लिखित सूचना जनगणना निदेशालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। एक बार सीमाएं फ्रीज होने के बाद, जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य सरकार किसी भी नए जिले, तहसील, थाने या राजस्व अनुविभाग का गठन नहीं कर सकेगी और न ही उनकी सीमाओं में कोई बदलाव कर पाएगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि डेटा संकलन के समय किसी भी प्रकार का भौगोलिक भ्रम न रहे।
मध्य प्रदेश में आगामी राष्ट्रीय जनगणना की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य सरकार ने 31 दिसंबर को प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं को 'फ्रीज' करने से पहले अधिकारियों की नियुक्तियां और जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, अब जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा या लापरवाही भारी पड़ सकती है।
जनगणना के सुचारू संचालन के लिए प्रशासनिक ढांचा तैयार कर लिया गया है। संभागायुक्तों को 'संभागीय जनगणना अधिकारी' और जिला कलेक्टरों को 'प्रमुख जनगणना अधिकारी' की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलों में कार्य की देखरेख के लिए कलेक्टर द्वारा नामित अपर कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधिकारी 'जिला जनगणना अधिकारी' के रूप में तैनात रहेगा। इनके अलावा प्रगणकों और 13 अन्य श्रेणी के अधिकारियों को भी विशिष्ट दायित्व सौंपे गए हैं।