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आज से शुरू हुआ : हमारे पूर्वजों के प्रति-श्रध्दा-कृतज्ञता और तर्पण का पवित्र पर्व-पितृपक्ष

📅 27 September 2026, 07:56 PM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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आज से शुरू हुआ : हमारे पूर्वजों के प्रति-श्रध्दा-कृतज्ञता और तर्पण का पवित्र पर्व-पितृपक्ष
आज से शुरू हुआ : हमारे पूर्वजों के प्रति-श्रध्दा-कृतज्ञता और तर्पण का पवित्र पर्व-पितृपक्ष

पवित्र पितृपक्ष में- अपने पूर्बजों के लिए तर्पण- पूजन- श्राद्ध- और दान कर लें पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद

D.News-आतकी आबाज- निष्पक्ष प्रहरी- न्यूज रिपोर्टर- दिनेश यादव-रमपुरी

रमपुरी / मोहगांव.

सांथियो नमस्कार- अपने पूर्बजों के चरणों में कोटि कोटि साष्टांग नमन-मित्रो आप सभी को विदित है कि आज से पवित्र पितृपक्ष का पावन पर्व प्रारंभ हो गया है- आपको बता दें कि- सनातन संस्कृति में हमारे जीवन की नींव केवल भौतिक सुखों पर नहीं- बल्कि गहरे नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर टिकी है.

● मानव जीवन में सबसे बडा और सर्वोपरी है पित्र ऋण

हमारे शास्त्रों में तीन प्रमुख ऋणों का उल्लेख मिलता है- देव ऋण- ऋषि ऋण- और पितृ ऋण- इनमें से मानव जीवन का सबसे बड़ा और सर्वोपरि ऋण माना गया है- पितृ ऋण- यह शरीर- यह रक्त- ये संस्कार और आज हम जो कुछ भी हैं- वह सब हमारे पूर्वजों की ही देन है 

● हमारे पूर्वजों के प्रति- श्रध्दा- कृतज्ञता- और तर्पण का पवित्र पर्व- पितृपक्ष

सास्त्रों में बताए गए मानव जीवन कि इन्ही महाऋण के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन समय आज से शुरू हो चुका है- सांथियो- यह-16 दिन का पवित्र पितृपक्ष केवल एक धार्मिक कर्मकांड या अंधविश्वास नहीं हैं- वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें- तो हमारे पूर्वजों के संस्कार- उनकी ऊर्जा और उनकी स्मृतियाँ हमारे डीएनए के माध्यम से आज भी हमारे भीतर जीवित हैं इसलिए- यह समय अपनी उन्हीं जड़ों को याद करने और उन्हें सम्मान देने का है

● श्रध्दा से ही हुई है श्राद्ध शब्द कि उत्पत्ती 

सांथियों- श्राद्ध' शब्द की उत्पत्ति ही 'श्रद्धा' से हुई है- जब हम पूर्ण निष्ठा- आदर और विश्वास के साथ अपने पूर्वजों को याद करते हैं- तो वही श्राद्ध है- 'तर्पण' का अर्थ केवल पानी या तिल अर्पित करना नहीं है- बल्कि अपनी चेतना से अपने पूर्वजों को यह विश्वास दिलाना है कि 'हम आपको भूले नहीं हैं और आपके दिए संस्कार आज भी हमारे परिवारों में जीवित हैं- ऋषियों ने इस पावन काल में केवल मनुष्यों को ही नहीं- बल्कि पूरी प्रकृति को जोड़ा है- यही कारण है कि इस दौरान ब्राह्मण भोज के साथ- साथ गाय- कौवा- कुत्ता और चींटियों को भी भोजन कराया जाता है- जो हमें पूरी सृष्टि के प्रति दया और सह- अस्तित्व का पाठ पढ़ाता है

● पवित्र पितृपक्ष में-अपने पूर्बजों के लिए तर्पण-पूजन-श्राद्ध-और दान कर लें पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद

आइए- आज से शुरू हुए इस पावन पितृ पक्ष में हम सभी पूरी श्रद्धा- शुद्धता और अटूट विश्वास के साथ अपने- अपने पूर्वजों का स्मरण करें- उनके निमित्त तर्पण और दान करें- और उनसे प्रार्थना करें कि उनका आशीर्वाद और स्नेह सदा हमारे परिवारों पर बना रहे ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी संस्कारी और समृद्ध बन सकें- अपने पूर्वजों के चरणों में सादर नमन

  • आयुः प्रजां धनं विद्यां स्वर्गं मोक्षं सुखानि च। प्रयच्छन्तु तथा राज्यं पितरः श्राद्धतर्पिताः
  • ( अर्थात्: श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण हमें लंबी आयु- सुयोग्य संतान- धन- विद्या- सुख- समृद्धि और मोक्ष प्रदान करते हैं )

    !! जय श्रीकृष्ण-हर हर महादेव-अपने पूर्बजों के चरणों में सादर नमन!! 

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