📅 Monday, 14 September 2026 | 11:38 AM IST
लाइव सेंसेक्स: 74,781.76 ▼ -120.83 (-0.16%) निफ्टी 50: 23,398.10 ▼ -79.70 (-0.34%) 🪙 सोना 24K (10g): ₹146,770 🥈 चांदी (1kg): ₹216,200 🌧️ उज्जैन: 26°C (वर्षा / बूंदाबांदी)
ज्योतिषी

रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का संयोग 28 अगस्त को, जानें कब लगेगा सूतक और किस समय बांधे राखी : रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त

📅 21 August 2026, 01:05 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 11 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का संयोग  28 अगस्त को, जानें कब लगेगा सूतक और किस समय बांधे राखी : रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का संयोग 28 अगस्त को, जानें कब लगेगा सूतक और किस समय बांधे राखी : रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन न केवल एक त्योहार के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह दिन भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और अपनापन भरता है। शास्त्रों की मानें, तो इस शुभ दिन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं। वहीं, भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देकर उसके प्रति अपने प्रेम और स्नेह को व्यक्त करता है।

रिश्तों और भावनाओं से भरा यह दिन सभी के लिए बेहद खास होता है। यही कारण है कि, अक्सर लोगों को सालभर इस पर्व का इंतजार रहता है और लोग काफी पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू कर देते हैं। लेकिन इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर ग्रहण का साया भी पड़ने जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या ग्रहण भारत में दिखाई देगा, सूतक काल मान्य होगा या नहीं और बहनें अपने भाई को किस समय राखी बांध सकेंगी। आइए इन सभी सवालों के जवाबों को विस्सार से जानते हैं।

रक्षाबंधन 2026

  • पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी।
  • इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। 
  • तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
  • चंद्र ग्रहण 2026 : 28 अगस्त 2026 को राखी के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी। इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल और ग्रहण से जुड़े नियम दोनों ही मान्य नहीं रहेंगे। ऐसे में बहनें बिना सूतक की बाधा के अपने भाई को राखी बांध सकती हैं।

    रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त

  • 28 अगस्त 2026 को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 7 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
  • अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 9 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
  • कब रहेगा भद्रा का साया ? : इस साल 27 अगस्त 2026 को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसलिए 28 अगस्त को बिना किसी बाधा के श्रद्धा और उल्लास के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।

    कहां दिखाई देगा ग्रहण? :  28 अगस्त 2026 का आंशिक चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।

    मुहूर्त क्या होता है?

    मुहूर्त वह शुभ समय होता है जिसे किसी विशेष अनुष्ठान को संपन्न करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। यह तिथि (चंद्रमा का दिन), वार (कार्यदिवस), नक्षत्र (चंद्रमा का घर) और करण की स्थिति के अनुसार निर्धारित होता है। सभी मुहूर्तों की ऊर्जा एक समान नहीं होती। मुहूर्त से ही यह पता चलता है कि किन मुहूर्तों की ऊर्जा एक समान है।

    रक्षा बंधन के इस समारोह में एक सच्ची प्रतिज्ञा शामिल होती है। बहन अपने भाई के लिए प्रार्थना करती है, जिसे धागे में बांधा जाता है। बदले में भाई उसकी रक्षा करने का वादा करता है। 

    सुबह का मुहूर्त: सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

    लगभग चार घंटे। यह एक अच्छा-खासा समय है - सबसे विस्तृत पूजा के लिए भी पर्याप्त, कई भाई-बहनों के साथ क्रमानुसार पूजा करने के लिए, विदेश में रहने वाले भाइयों के साथ वीडियो कॉल करने के लिए और उसके बाद आराम से नाश्ता करने के लिए भी पर्याप्त समय।

    अधिकांश परिवार सुबह 7 से 9 बजे के बीच राखी की रस्म पूरी करते हैं, जब सभी लोग नहा चुके होते हैं, थाली तैयार हो चुकी होती है और घर में राखी की सुबह का खास शांत और खुशनुमा माहौल होता है। इसके लिए कोई निश्चित समय नहीं है। मुहूर्त एक अवधि है, कोई निश्चित समय नहीं। यदि रस्म सुबह 8:45 बजे शुरू होकर 9:30 बजे तक समाप्त हो जाती है, तो यह पूरी तरह शुभ है।

    भद्र काल क्या है, और क्या आपको 2026 में इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता है?

    रक्षा बंधन के आसपास हर साल भाद्र नक्षत्र को लेकर सवाल उठता है। चिंता की बात यह है कि पंचांग में भाद्र नक्षत्र राखी बांधने के लिए अशुभ माना जाता है। यह आम तौर पर रोजमर्रा के कामों के लिए अशुभ होता है, लेकिन रक्षा बंधन के दौरान विशेष रूप से अशुभ होता है। भाद्र नक्षत्र में राखी बांधने से पारंपरिक रूप से परहेज किया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह नक्षत्र राखी के सुरक्षात्मक बंधन को स्थापित करने के लिए प्रतिकूल ऊर्जा से भरा होता है।

    कुछ वर्षों में इससे कार्यक्रम को लेकर गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। भद्रा नक्षत्र सुबह के समय पड़ता है, और परिवारों को इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी दोपहर तक। खराब वर्षों में, देर शाम तक। दिन सिमट जाता है, समारोह जल्दबाजी में संपन्न होता है, और जब यह समाप्त हो जाता है तो सभी को थोड़ी राहत मिलती है।

    2026 उन वर्षों में से एक नहीं है। 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही भद्रा नक्षत्र समाप्त हो जाता है। जब तक घरवाले जागते हैं और थाली सजाई जाती है, तब तक भद्रा नक्षत्र समाप्त हो चुका होता है। पूरी सुबह स्वच्छ रहती है। यही कारण है कि 2026 को विशेष रूप से शुभ रक्षा बंधन माना जाता है।

    अपराह्न काल - दोपहर की खिड़की

    अपराह्न दिन के उजाले का तीसरा चरण है - लगभग 28 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार)। पंचांग शास्त्र के अनुसार, रक्षा बंधन के लिए अपराह्न का समय सुबह से भी अधिक शुभ माना जाता है, हालांकि व्यावहारिक कारणों से अधिकांश परिवार सुबह के समय रक्षा बंधन मनाते हैं।

    प्रदोष काल क्या है और क्या मुझे इससे बचना चाहिए?

    प्रदोष काल शाम का समय होता है - 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार लगभग शाम 6:30 से 8:00 बजे तक। पारंपरिक सलाह के अनुसार, इस दौरान रक्षा बंधन समारोह नहीं करना चाहिए। इसका कारण यह है कि प्रदोष दिन और रात के बीच का संक्रमण काल ​​होता है, और इस समय अनुष्ठानिक ऊर्जा कम स्थिर होती है।

    •┄┅═══❁✿❁● ● ● ❁✿❁═══┅┄•

    1. ""हर पीढ़ी को अगली पीढ़ी...बिगड़ी हुई लगती है, क्योंकि उसे बदलाव से ज्यादा, अपनी आदतों से प्रेम होता है...''!
    2. "जब लोग दाग़ ढूंढने में व्यस्त...हो तो समझ लेना आपकी, चमक उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही है...!! 
    3. "बुरे वक्त में जो आपसे जुदा...न हो, गौर से देखियेगा कही, वह खुदा न हो"..!
    4. ""जो हम खुशियों से सिखाते हैं उसे हम कभी नहीं भूलते।'' ""...!
    5. ""वक़्त चाहें जितना भी परखे...खुद्दार इंसान, अपने उसूल नहीं बदलता...!! 
    6. चुप हूँ सब जानता मगर हूँ मैं...,ये न समझो कि बे-ख़बर हूँ मैं...!

    •┄┅═══❁✿❁● ● ❁✿❁═══┅┄•

    ● Disclaimer :इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.

    HISTORY : !!आओ चले बांध खुशियों की डोर...नही चाहिए अपनी तारीफो के शोर...बस आपका साथ चाहिए...समाज विकास की ओर!!

    📲

    पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

    ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

    चैनल से जुड़ें →

    संबंधित खबरें

    सभी देखें →
    WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें