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होलिका दहन कब होगा, 2 या 3 मार्च : क्या चंद्र ग्रहण 2026 की वजह से बदल जाएगी डेट, जानें होलिका दहन की तारीख

धर्मशास्त्र Published by: paliwalwani Updated Fri, 13 Feb 2026 11:27 AM
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ज्यो. शैलेन्द्र  सिंगला पलवल हरियाणा M. 9992776726

होलिका दहन 2026 कब है, कब है: होलिका दहन हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पर्व है, जिसे फाल्गुन पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस दिन भक्त प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु की क्रूरता की कथा याद की जाती है, जिसमें अहंकार और अधर्म का अंत होता है।

मान्यता है कि अग्नि में जलने से नकारात्मक ऊर्जा, दोष और पुराने कष्ट समाप्त हो जाते हैं, इसलिए लोग होलिका की आग में गेहूं की बालियां, उपले और नारियल अर्पित करते हैं। ऐसे तो होलिका दहन को होली के त्योहार से एक दिन पहले मनाया जाता है। लेकिन 2026 में होलिका दहन की तिथि पर ग्रहण का साया है। यहां जानें कि होलिका दहन 2026 में कब है, 2026 में होलिका दहन का पर्व कब मनाया जाएगा।

2026 में होलिका दहन कब है...

पंचांग के अनुसार, होलिका दहन का पर्व फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर आता है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। ऐसे में तिथि के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का चांद 3 मार्च को दिखेगा। लेकिन इस तारीख में चंद्र ग्रहण लग रहा है और शाम के समय भद्रा का साया भी है। ऐसे में अधिकांश पंडित और ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि 2026 में होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाना शास्त्र अनुसार शुभ रहेगा।

हालांकि कुछ स्थानीय पंचांगों में 3 मार्च के शाम का समय भी शुभ बताया गया है। लेकिन ग्रहण वाले दिन पूजा और अनुष्ठान नहीं करने का नियम देखते हुए होलिका दहन 2 मार्च 2026, दिन सोमवार को करना सही माना जा रहा है।

चंद्र ग्रहण की वजह से क्यों बदल रही है होलिका दहन की डेट

3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भारत में दिखाई देगा। यह भारतीय समय के अनुसार 3:20 दोपहर से दिखना शुरू होगा। यह लगभग 5 घंटे 39 मिनट तक का ग्रहण चक्र रहेगा, जिसमें आंशिक और पूर्ण दोनों चरण शामिल हैं। चांद निकलते ही ग्रहण का कुछ हिस्सा लगभग 6:26 PM से 6:46 PM (भारतीय समय) के बीच दिखाई देगा। इस दौरान चांद थोड़ा धुंधला या ढका हुआ नजर आ सकता है क्योंकि वह पहले ही पृथ्वी की छाया में कुछ हिस्सा में है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल को भी माना जाता है। मार्च 2026 में लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक समय सुबह 06:20 बजे से लेकर शाम 06:46 बजे तक रहेगा।

चूंकि होलिका दहन का समय भी संध्या का ही माना जाता है, इस वजह से इस तारीख पर दिखने वाला चांद ग्रहण से दूषित माना जाता है। वहीं सूतक काल का भी प्रभाव रहेगा। यह समय पूजा पाठ या किसी भी शुभ काम के लिए सही नहीं माना जाता है। यही वजह है कि ज्योतिष के जानकार 3 मार्च को होलिका दहन नहीं मनाने की सलाह दे रहे हैं।

हालांकि कई जानकारों का ये भी कहना है कि सूतक के समाप्त होने के बाद 3 मार्च को 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक होलिका दहन किया जा सकता है।

होलिका दहन 2026 डेट एंड टाइम

अगर आप 2 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो इसके लिए शाम को 6:30 बजे के बाद का समय चुन सकते हैं। इस बार होलिका दहन को 2 मार्च 2026 की शाम को शुभ मुहूर्त में करना बेहतर समझा जा रहा है। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इसका शुभ समय लगभग शाम 6:28 बजे से रात 8:52 बजे तक (IST) का है, जब प्रदोष काल और पूर्णिमा तिथि दोनों अनुकूल रहते हैं, इसलिए इस समय के बीच होलिका दहन करना शुभ फलदायी माना जाता है।

अगर आप 3 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक यह पूजन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने एरिया के पंडित जी या जानकार से संपर्क कर सकते हैं।

होलिका दहन पर क्या किया जाता है

होलिका दहन पर शाम के समय तय शुभ मुहूर्त में होलिका जलाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। आग जलाने से पहले लोग होलिका की परिक्रमा करते हैं और घर-परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं। कई जगह गोबर के उपले, लकड़ी, सूखी घास के साथ गेहूं की बालियां, चना, नारियल या नई फसल अर्पित की जाती है, ताकि आने वाला साल समृद्ध रहे। होलिका की अग्नि में अहंकार, डर और पुराने गिले-शिकवे छोड़ने का भाव रखा जाता है। दहन के बाद कुछ लोग राख को तिलक के रूप में लगाते हैं, जिसे सुरक्षा और शुभता का संकेत माना जाता है। कुल मिलाकर, होलिका दहन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मन को हल्का करने और नई शुरुआत का भाव जगाने का पर्व है।

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