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Gupt Navratri 2026 : 12 साल बाद आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में बने दुर्लभ योग, पूजा के लिए मिलेंगे मात्र इतने दिन, जानें क्या है खास

धर्मशास्त्र Published by: paliwalwani Updated Wed, 08 Jul 2026 11:19 PM
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि तंत्र-मंत्र और दस महाविद्याओं की साधना का महाकाल है. यह वह समय है जब साधक रात-रात भर जागकर मां दुर्गा के गुप्त स्वरूपों की आराधना करते हैं. इस बार यह नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है और 23 जुलाई तक चलेगी. खास बात यह है कि 12 साल बाद ऐसे दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी खास बना रहे हैं. आइए जानते हैं, घट स्थापना का मुहूर्त क्या है और इस बार क्या खास होगा?

कब से कब तक?

गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई, बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई तक मनाई जाएगी. घटस्थापना के लिए 15 जुलाई की सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक का समय शुभ है. घटस्थापना 15 जुलाई को सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे के बीच की जानी चाहिए. चतुर्थी तिथि के क्षय होने के कारण यह नवरात्रि 9 के बजाय 8 दिनों की होगी और 23 जुलाई को समाप्त होगी.

दुर्लभ योगों की बौछार

इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत कई शुभ योगों के साथ हो रही है. 15 जुलाई को चंद्रमा और गुरु कर्क राशि में साथ होंगे, जिससे गजकेसरी राजयोग बनेगा. गुरु 12 साल बाद कर्क राशि में हैं, इसलिए यह योग बहुत खास है. साथ ही, इस दिन बुध-पुष्य योग भी बनेगा, क्योंकि पुष्य नक्षत्र पूरे दिन रहेगा. बुध और सूर्य मिथुन राशि में होने से बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है. पूरे नौ दिनों में दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग भी बनेंगे.

क्या है खास?

आम नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं – मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला – की साधना की जाती है. इस नवरात्रि की साधना को गुप्त रखने की परंपरा है.

क्या करें, क्या न करें?

23 जुलाई को भड़ली नवमी है, लेकिन 16 जुलाई 2026 से गुरु तारा अस्त हो जाएंगे. इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे. 25 जुलाई 2026 से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जिसके बाद अगले चार महीने तक कोई शुभ कार्य नहीं होंगे.

 

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● Disclaimer :इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.
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