24 घंटे में 65 बार फोन और चैट, मोबाइल रिकॉर्ड से खुलीं परतें
मेरठ.
मेरठ के सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप ने अमित कश्यप की हत्या कर उसे सर्पदंश दिखाने की कोशिश की। पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्ड से साजिश उजागर हुई। अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
मेरठ के थाना भावनपुर क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में हुआ अमित कश्यप हत्याकांड किसी आम हत्या की वारदात नहीं थी। यह एक ऐसी साजिश थी, जिसमें कत्ल को सांप के काटने से हुई मौत का रूप देने की कोशिश की गई।
आरोप है कि पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप ने मिलकर हत्या की ऐसी योजना बनाई कि परिजन ही नहीं, पुलिस भी शुरुआत में इसे एक हादसा समझ बैठे। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और मोबाइल सर्विलांस ने धीरे-धीरे साजिश की परतें खोल दीं। जिस सांप को मौत की वजह दिखाने की तैयारी थी, वही इस मामले में सबसे बड़े राज का हिस्सा बन गया।
अकबरपुर सादात गांव का अमित कश्यप मकानों में टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करता था। इसी काम के दौरान उसकी पहचान अमरदीप से हुई। दोनों साथ काम करने लगे और इसी सिलसिले में अमरदीप का अमित के घर आना-जाना भी शुरू हो गया।
धीरे-धीरे अमरदीप और अमित की पत्नी रविता के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। लेकिन जब अमित को इस रिश्ते की भनक लगी, तो उसने इसका विरोध किया। इसके बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने एक परिवार को उजाड़ दिया। आरोप है कि रविता और अमरदीप ने अमित को अपने रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
हत्या को प्राकृतिक मौत का रूप देने के लिए कथित तौर पर एक सपेरे से 1,000 रुपए में सांप खरीदा गया। योजना यह थी कि अमित की मौत को सर्पदंश का मामला दिखाया जाए, ताकि किसी को हत्या का शक न हो।
आरोपों के मुताबिक, रात में जब अमित गहरी नींद में सो रहा था, तब रविता ने अमरदीप को घर बुलाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर बिस्तर पर सो रहे अमित का मुंह और नाक दबाकर दम घोंट दिया। अमित की मौत के बाद उसके शव और बिस्तर पर सांप छोड़ दिया गया, ताकि सुबह जब परिजन उसे देखें तो उन्हें लगे कि जहरीले सांप के काटने से उसकी जान गई है।
वारदात के बाद अमरदीप रात के अंधेरे में घर से निकल गया, जबकि रविता दूसरे कमरे में जाकर सो गई। सुबह होते ही रविता ने घर में कोहराम मचा दिया। परिजनों ने जब अमित को बिस्तर पर मृत देखा और पास में सांप पाया, तो पहली नजर में उन्हें भी यही लगा कि उसकी मौत सर्पदंश से हुई है।
अमित के शरीर पर सांप के डसने जैसे 10 निशान दिखाई दे रहे थे। इन निशानों ने शुरुआती तौर पर हादसे की आशंका को और मजबूत कर दिया। इसके बाद एक सपेरे को बुलाया गया, जिसने कमरे में मौजूद सांप को पकड़ा। पहली नजर में मामला भले ही सर्पदंश का लग रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम ने पूरी कहानी बदल दी।
पुलिस ने मामले की जांच के लिए अमित के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट सामने आते ही कथित साजिश की सबसे अहम कड़ी उजागर हो गई। अमित की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि मुंह और नाक दबाकर दम घोंटने से हुई थी।
पोस्टमार्टम में अमित के चेहरे और दोनों हाथों पर संघर्ष और खरोंच के निशान भी मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मृतक के विसरा और शरीर में सांप के जहर का कोई अंश नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने मामले को हादसे के बजाय हत्या के एंगल से खंगालना शुरू किया। अब सवाल सिर्फ अमित की मौत का नहीं था, बल्कि उस साजिश का था, जिसे सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई थी।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस उस सपेरे तक पहुंच गई, जिससे कथित तौर पर सांप खरीदा गया था। सपेरे ने बताया कि अमरदीप ने उससे देवी जागरण और धार्मिक पूजा का हवाला देकर सांप लिया था।
सपेरे के मुताबिक, वह बूढ़ा 'घोड़ा पछाड़' यानी धामन प्रजाति का सांप था। उसके दांत टूटे हुए थे। ऐसे में सांप के काटने से अमित की मौत होने की आशंका और कमजोर पड़ गई। सांप की खरीद से लेकर उसकी प्रजाति तक से जुड़े इन तथ्यों ने पुलिस की जांच को नई दिशा दी और कथित सर्पदंश की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।
इस मामले में मोबाइल फोन का डेटा भी जांच का अहम हिस्सा बना। टेलीकॉम कंपनियों के कॉल रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि हत्या से जुड़े 24 घंटे के दौरान रविता और अमरदीप के बीच 65 बार फोन कॉल और व्हाट्सएप पर बातचीत हुई थी।
इतना ही नहीं, घटना से पहले के छह महीनों में दोनों के बीच 2,000 से अधिक बार बातचीत और देर रात कॉल किए जाने के रिकॉर्ड भी सामने आए। इन डिजिटल साक्ष्यों ने पुलिस को दोनों के बीच संपर्क की प्रकृति और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के साथ मोबाइल रिकॉर्ड भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस का शक रविता और अमरदीप पर गहराता गया। पुलिस ने रविता से पूछताछ की, जिसके बाद अमरदीप की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। दोनों को गिरफ्तार किया गया और मामले में अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।
करीब 17 महीने तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में दोषी ठहराया। इसके बाद शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
इस तरह अमित कश्यप हत्याकांड में जिस मौत को सांप के काटने से हुआ हादसा दिखाने की कोशिश की गई थी, उसकी सच्चाई पोस्टमार्टम, तकनीकी साक्ष्यों और जांच की कड़ियों से सामने आई। अदालत के फैसले के साथ यह मामला एक अहम मुकाम पर पहुंचा।