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अमावस्या • 2026 🕉️ पर्व देवता: पितृ देव व भगवान सूर्य नारायण

आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) 2026

Ashadha Amavasya / Halharini • 📅 12 अगस्त 2026, बुधवार (बुधवार) • 📜

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मुख्य शुभ पूजा मुहूर्त: पितृ तर्पण व श्राद्ध काल: 13:49 से 16:25 (अपराह्न)
📲 आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) शुभ मुहूर्त व विधि व्हाट्सएप पर शेयर करें

📖 आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) क्यों मनाया जाता है? (पौराणिक कथा व महत्व)

अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और पिंडदान सात पीढ़ियों को तृप्त करता है।

🪔 आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) की संपूर्ण पूजा विधि

1. पवित्र नदी में स्नान करें अथवा घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और जल से पितृ तर्पण करें।
3. ब्राह्मण भोजन कराएं और अन्न-वस्त्र दान करें।

📋 आवश्यक पूजन सामग्री चेकलिस्ट

काले तिल
कुश
जौ
गंगाजल
सफेद पुष्प

🕉️ प्रमुख मंत्र एवं स्तोत्र

मंत्र जप
पितृ गायत्री मंत्र:

ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) - आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी)

Q. वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) कब मनाया जाएगा?

Ans. आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) वर्ष 2026 में 12 अगस्त 2026, बुधवार (बुधवार) को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

Q. आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) का सबसे सटीक शुभ पूजा मुहूर्त क्या है?

Ans. शुभ पूजा मुहूर्त: पितृ तर्पण व श्राद्ध काल: 13:49 से 16:25 (अपराह्न)

Q. आषाढ़ अमावस्या (हलहारिणी) की पूजा में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

Ans. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। वेदी पर पितृ देव व भगवान सूर्य नारायण की प्रतिमा स्थापित कर रोली, अक्षत, पुष्प, दीप, नैवेद्य अर्पित करें तथा विधिवत आरती करें।