बुढ़ापा देने के पीछे भगवान का अद्भुत उद्देश्य : बुढ़ापा कोई अभिशाप नहीं, बल्कि भगवान की कृपा

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!! बुढ़ापा देने के पीछे भगवान का अद्भुत उद्देश्य !!

यह लेख ऐसा है कि पढ़कर आँखें नम हो जाएँ...

सारांश :

एक बार इंसान ने भगवान से पूछा—

“अगर आप चाहें तो इंसान को हमेशा जवान और जवान ही रख सकते हैं, है ना?”

तब भगवान मुस्कुराकर बोले:

1. आँखों की रोशनी कम कर दी → ताकि उसे इस खूबसूरत दुनिया का मोह कम हो जाए।

2. शरीर पर झुर्रियाँ डाल दीं → ताकि उसे अपनी सुंदरता का मोह न रहे।

3. पैरों की चलने की ताकत कम कर दी → ताकि उसे घूमने-फिरने का मोह न रहे।

4. कानों को कमजोर कर दिया → ताकि दूसरों की बातें सुनने का मोह कम हो जाए।

5. बिस्तर पर रहने के लिए मजबूर कर दिया → ताकि जीवन से मोह धीरे-धीरे कम हो जाए।

और फिर भगवान ने कहा :

“अगर इंसान कभी बूढ़ा ही न होता, तो क्या वह इस खूबसूरत दुनिया का मोह छोड़कर मृत्यु को सहजता से स्वीकार कर पाता?”

जवानी में मृत्यु हो जाए तो परिवार को वर्षों तक दुख रहता है।

लेकिन बुढ़ापे में मृत्यु आए तो लोग उसे सहजता से स्वीकार कर लेते हैं और कुछ दिनों बाद जीवन सामान्य हो जाता है।

इसीलिए भगवान ने इंसान के मोह को धीरे-धीरे कम करने के लिए बुढ़ापा बनाया।

भावार्थ :

बुढ़ापा कोई अभिशाप नहीं, बल्कि भगवान की कृपा है।

यह धीरे-धीरे हमें दुनिया के मोह से मुक्त करता है, ताकि हम शांति और स्वीकार भाव के साथ जीवन के अंतिम पड़ाव को जी सकें।

“बस, भगवान ने इंसान को इस मोह से मुक्त करने के लिए बुढ़ापा बनाया।” 

बहुत गहरा और भावपूर्ण संदेश है। 

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