इंदौर. माँ अहिल्ल्या की नगरी में आए दिन ना जाने कैसे...कैसे...मामले उजागर हो रहे, उससे हर शहरवासी असुरक्षित महसुश कर रहा है कि कहीं में सम्मति दुसरे के नाम तो नहीं हो गई...
क्योंकि इंदौर नगर पालिक निगम में नामांत्ररण घोटाला की काली छाया से बाहर ही नहीं निकल पा रहा है...उसमें छोटे कर्मचारियों को शिकार बना दिया वहीं बड़ी मछली अभी-भी इंदौर निगम समुद्व में खुल्ले आम घूम रहीं है...उन बड़ी मछलियों पर कौन हाथ डाले...वो कहते है कि मुख्यमंत्री, कलेक्टर, मंत्री, विधायक, महापौर...निगम परिषद, पार्षद का ख्याल रखा, तभी हम सुरक्षित हैं...वरना हम कौन पहचानता...
एक बार फिर इंदौर शहर पंढरीनाथ थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने उजगार हुआ. एक अधिवक्ता (वकील) ने अपने पक्षकार को फायदा पहुंचाने के लिए राजस्व विभाग का एक फर्जी आदेश तैयार कराया और आवश्यकता नुसार पेश कर दिया.
तहसीलदार ने जांच पड़ताल की तो पोल खुली...तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने अधिवक्ता और उनके पक्षकार के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैं.
अपर आयुक्त कार्यालय में किसने फर्जी आदेश तैयार किया
एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल ने बताया कि पंढरीनाथ थाने पर तहसीलदार राकेश सिंह द्वारा एक शिकायती आवेदन सौंपा गया था. शिकायत में पुष्प रतन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकित और उनके अधिवक्ता आशीष के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया हैं. मामला जमीन से जुड़े एक फैसले का हैं. गंभीर आरोप है कि अधिवक्ता आशीष ने अपने पक्षकार अंकित को फायदा पहुंचाने की नीयत से राजस्व विभाग के अपर आयुक्त कार्यालय का एक फर्जी आदेश तैयार किया. इस जाली आदेश में जमीन का फैसला पक्षकार के हक में सुनाए जाने की बात दर्शाई गई थी.
कार्यालय से कोई भी आदेश जारी नहीं हुआ
जब राजस्व विभाग द्वारा आदेश की पड़ताल की गई, तो खुलासा हुआ कि अधिकारी के कार्यालय से ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया है. पूरी तरह से कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार कर कोर्ट/विभाग को गुमराह करने और अवैध लाभ उठाने की कोशिश की गई थी.
तहसीलदार की शिकायत ओर प्राथमिक जांच के बाद पंढरीनाथ थाना पुलिस इंदौर ने कूटरचित दस्तावेज तैयार करने (फर्जीवाड़ा) और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी.