मोदी के बाद ट्रंप और नेतन्याहू भी मछार से बात करने को इच्छुक : हनुमान चालीसा के पाठ से शक्ति और बुद्धि मिली

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चीन और अमेरिका को भारतीय पायलट स्मित मछार की सनातनी और ओमन के को-पायलट हमस अलहमामी की कट्टरपंथी सोच को समझना चाहिए

नई दिल्ली. दुनिया के दो शक्तिशाली देश अमेरिका और चीन समय समय पर अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर पाकिस्तान को सपोर्ट करते है, जबकि पाकिस्तान पूरी दुनिया में आतंक की फैक्ट्री बना हुआ है। लेकिन भारत की सनातनी और पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच का ताजा उदाहरण 30 सितंबर 2026 को दुबई एयरलाइंस के विमान में देखने को मिली।

दुबई से इजरायल जा रहे इस विमान में 180 यात्री सवार थे, जिनमें से 150 इजरायली थे। विमान को भारत के पायलट स्मित मछार उड़ा रहे थे, जबकि कॉकपिट में को-पायलट के तौर पर ओमान के पायलट हमम अलहमामी थे। जब विमान सऊदी अरब के हवाई मार्ग पर था और कुछ ही समय में इजरायल पहुंचने वाला था कि तभी को-पायलट हमम अलहमामी ने चाकू से पायलट मछार पर हमला कर दिया।

मछार ने न केवल विमान को संभाल, बल्कि स्वयं को सुरक्षित रखते हुए कॉकपिट का दरवाजा भी खोल दिया। इससे विमान के यात्री भी बचाव के लिए कॉकपिट में आए गए। अब अलहमामी के बारे में जो जानकारी मिली रही है उसके अनुसार वह कट्टरपंथी सोच वाला इंसान है। इजरायल और ईान के बीच चल रहे युद्ध के मद्देनजर ही अलहमामी 150 इजरायली नागरिकों वाले विमान को क्रैश करवाना चाहता था। यदि स्मित मछार अपनी शक्ति और बुद्धि का परिचय नहीं देते तो अलहमामी विमान को इजरायल में किसी ऊंची बिल्डिंग से टकराता।

यानी अलहमामी एक सुसाइड बम के तौर पर को-पायलट के रूप में विमान में बैठा था। सवाल अब दुबई एयरलाइंस पर भी उठ रहे है। इजरायल ने पहले ही कह रखा था कि दुश्मन देश के किसी भी पायलट को इजरायल आने वाले विमान में काम न दिया जाए। मौजूदा युद्ध की स्थिति में ओमान ईरान के अलहमामी की ड्यूटी नहीं लगनी चाहिए थी। लेकिन दुबई एयरलाइंस ने सुरक्षामानकों की अनदेखी कर कट्टरपंथी सोच वाले अलहमामी को को-पायलट के रूप में इजरायल जाने वाले विमान में सवार कर दिया।

जानकारी के अनुसार दुबई एयरलाइंस में नियुक्त होने से पहले अलहमामी सीरिया में रहा था। सीरिया में ही अलहमामी कट्टरपंथियों के संपर्क में आया। ऐसे कट्टरपंथियों ने अलहमामी को निर्दोष लोगों की जान लेने की शिक्षा दी। एक ओर अलहमामी की कट्टरपंथी सोच तो दूसरी ओर भारत कीसनातन संस्कृति की सोच सामने आई है। अलहमामी ने जब स्मित मछार पर चाकू से हमला किया तो मछार ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

हनुमान चालीस के पाठ की वहल से मछार को अलहमामी से लडऩे की शक्ति और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की बुद्धि मिली। यानि भारत की सनातन संस्कृति दूसरों की जान बचाने की शिक्षा देती है। चीन और अमेरिका जब पाकिस्तान जैसे आतंकी देश की मदद करते हैं तो उन्हें इन दोनों सोच का ध्यान रखना चाहिए। चीन और अमेरिका की जान बचाने वाली सोच की मदद करनी चाहिए।

पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच कभी भी चीन और अमेरिका की मदद नहीं कर सकती है। अमेरिका से ज्यादा चीन को सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि चीन इन दिनों पाकिस्तान में ज्यादा निवेश कर रहा है। एक दिन यही कट्टरपंथी सोच चीन के लिए आत्मघाती होगी।

 ट्रंप और नेतन्याहू भी बात करने को इच्छुक :

सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती स्मित मछार से 2 अक्टूबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी ने मोबाइल पर वीडियो कॉल तकनीक से बात की। मोदी ने कहा कि आज 140 करोड़ की आबादी वाला भारत गौरवांति है। इस गौरव का श्रेय मोदी ने मछार को दिया।मोदीने जिस अंदाज में मछार की हौंसला अफजाई की, उससे मछार की आंखों में आंसू आ गए। मछार ने मोदी से कहा कि मेरे लिए तो आप प्रेरणा स्त्रोत है। मोादी पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्होंने मछार से मोबाइल पर बात की। अब इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मछार से बात करने को इच्छुक हैं। 

S.P.MITTAL BLOGGER

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