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देश के सर्वांगीण विकास के लिए बालकों का सुसंस्कारित होना आवश्यक : वर्मा

Ayush Paliwal     Category: राजसमन्द     08 Jun 2015 (7:13 PM)

राजसमंद। जिला कलक्टर कैलाशचन्द वर्मा ने कहा है कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ी का सुसंस्कारित होना आवश्यक है। ऐसे शिविरों से बालकों को शिक्षा के साथ-साथ वैदिक संस्कार शिक्षा भी प्राप्त हो जाती है, तो बालकों के उज्ज्वल जीवन के साथ देष के सर्वांगीण विकास में चार चांद लग सकते हैं। आज के समय में किताबी ज्ञान के अलावा संस्कारित जीवन में वैदिक शिक्षा की महत्ती आवश्यकता है। इस संबंध में सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं इस ओर प्रयास करती है तो, सुखद अनुभव होता है तथा बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

जिला कलक्टर बुधवार को जिले की चारभुजा तहसील की ग्राम पंचायत सेवन्त्री के कसार गांव में सनातन वैदिक शिक्षण संस्थान के सभास्थल पर 15 वें वैदिक संस्कार शिविर में वैदिक ज्ञान प्राप्त कर रहे बटुकों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस छोटे से गांव में लगातार 15 वर्षो से यह संस्था राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात सहित अन्य राज्यों के बालकों को सुसंस्कारित करने के लिए इस प्रकार के षिविर का आयोजन करके राष्ट्र निर्माण में सार्थक प्रयास कर रही है। जो अन्य सामाजिक संस्थाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। शिविर में हर उम्र के बालकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण प्रस्तुत किए गए जिनको सुनकर संस्कृत के ज्ञाता जिला कलक्टर भी अभिभूत हो गए। शिविर में सोनल दवे, मयुरी दवे, चेतना दवे एवं खुशी नामक बालिकाओं की ओर से शिव महिमा स्त्रोत की प्रस्तुती दी गई जिसकी सभी ने सराहना की।

वैदिक संस्कृति में सबसे ज्यादा शक्तिदायक शब्द कौनसा है

जिला कलक्टर ने सभी बटुकों से जानकारी प्राप्त करते हुए पूछा कि अपनी वैदिक संस्कृति में सबसे ज्यादा शक्तिदायक शब्द कौनसा है तो, बालको नेे समूह के रूप में तत्काल जवाब दिया ‘‘ऊँ‘‘ जिस पर जिला कलक्टर ने सभी बटुको धन्यवाद देते हुए कहा कि आपका उत्तर वास्तव में सही है। उन्होंने कहा कि ऊँ महाशक्ति दायक है एवं ब्रम्ह का ज्ञान करवाता है। वर्मा ने पूछा कि पंडित का मतलब क्या होता है जवाब मिला कि सत्य एवं असत्य का ज्ञान करने वाले को पण्डा कहते हैं और जो इस ज्ञान को प्राप्त कर लेता है, वही व्यक्ति पंडित होता हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि पंडित कोई जाति विषेष नहीं है, जो सत्य और असत्य के ज्ञान को प्राप्त कर ले, वही पंडित होता है। पंडित किसी भी जाति का हो सकता है। जिला कलक्टर ने स्वयं संस्कृत में दोहों को गाकर बटुकों को उनके अर्थ का ज्ञान करवाया। उन्होंने इस प्रकार के सफल आयोजन के लिए सनातन वैदिक संस्थान सहित गांव के लोगों को बहुत-बहुत बधाई का पात्र बताते हुए कहा कि इन सभी नन्हे-मुन्हें बालकों के माता-पिता सहित इनके गुरूजन भी साधुवाद के पात्र हैं, जिन्होंने इनकों विभिन्न प्रकार की शिक्षा दी ही है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की ओर से 15 दिवसीय आवासीय शिविर में इन बालकों को जो संस्कृति ज्ञान प्रदान किया गया है, वह इनके जीवन में सफलता सुनिश्चित करेगा। कलक्टर ने संस्था के महामंत्री पण्डित उमेष द्विवेदी से षिविर में वैदिक ज्ञान प्राप्त कर रहे बटुकों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा वे बटुकों से रूबरू हुए और वैदिक ज्ञान पर उनसे चर्चा की। उन्होंने बटुकों को बताया कि सनातन वैदिक ज्ञान श्रुति एवं स्मृति अर्थात् सुनकर एवं याद कर हजारों साल से आज तक पीढिय़ों को प्राप्त हो रहा है।

साढ़े चार हजार बालकों को दी वैदिक शिक्षा

संस्थान के पदाधिकारी एव सेंवन्त्री के सरपंच विकास दवे ने बताया कि भारतीय संस्कृति में आयी विकृति को दूर करने में एवं संस्कृति के उत्थान के लिए लगातार 15 वर्षों से कसार में हमारी संस्था 15 दिवसीय आवासीय शिविरों के माध्यम से करीब साढ़े चार हजार बालकों को वैदिक शिक्षा की ओर अग्रसर किया है, जिसमें ब्राम्हण षिक्षा सूत्र और तिलक अनिवार्यता एवं मंत्रो के ज्ञान के साथ देवता नमस्कार, प्रात: वन्दन, संध्यावन्दन, पुरन्सुक्त, रूद्धाअष्टाध्यायी, प्रारम्भिक ज्योतिष ज्ञान, दुर्गासप्तमी पाठ का सस्वर अध्यापन कराया जाता है। षिविर में प्रात: 5 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक गुरूकुल की भांती बालकों से मंदिरों, वृ़़़क्षों, प्रकृति के साथ विभिन्न प्रकार की ज्ञानोवर्धक जानकारी के साथ वेदों की शिक्षा दी जाती है।

फोटो- कसार में सनातन वैदिक शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित वैदिक संस्कार शिविर में बटुको सम्बोंधित करते कलक्टर वर्मा ।

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