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पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग - राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए - Paliwalwani.com

पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग - राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए

लवलेश पांडेय     Category: दिल्ली     22 Dec 2016 (8:59 PM)

सोशल मीडिया में पत्रकार सुरक्षा कानून का यह प्रस्ताव-पत्र कई ग्रूपों में देखा और पढ़ा। क्या यह पर्याप्त है ? इसमें क्या संशोधन हो और इसे अभियान कैसे बनाया जा सकता ताकि केंद्र सरकार इसे लागू करने के लिए बाध्य हो। ध्यान रहे कि हम पत्रकार किसी राजनितिक दलों की तर्ज पर सड़कों पर आंदोलन का रास्ता अख्तियार किये बगैर अपनी मांग कैसे मनवा सकते हैं।
देश के सभी पत्रकार संगठनों से आग्रह है कि अपने-अपने स्तर पर विचार मन्थन कर इसे अभियान बना कर क्रियान्वयन होने तक वैचारिक मशाल जलाए रखें और प्रदेश का जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपा जावे
प्रति, 

श्री नरेन्द्र मोदी
प्रधानमन्त्री भारत सरकार
नई दिल्ली,

विषय: पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग !

आदरणीय,

दुनिया के कई देशों में पत्रकार सुरक्षा कानून बने हैं, जो पत्रकारों को सही और सच्ची खबर लाने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन भारत आज भी पत्रकार सुरक्षा कानून से वंचित है। अत: सरकार भारत में तुरंत प्रभाव से “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू करे, क्योंकि पत्रकार ही है जो गली-मोहल्लों से लगा कर गांव, तहसील, जिले, संभाग, प्रदेश, देश की खबरें , शासन तथा प्रशासन तक पहुंचाता है । एक प्रकार से सरकार यदि शरीर है , तो पत्रकार आँख और कान।
यदि सरकार अपनी आँख और कान को पोषित नहीं करेगी तो सूचना-तंत्र समाप्त हो जाएगा और भ्रष्ट-तंत्र अपनी मनमानी कर सरकार की छवि धूमिल करने का काम करेगा ।

1- पत्रकार सुरक्षा कानून अविलम्ब लागू हो।

2- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर कवरेज के दौरान हमले को विशेष कानून के तहत दर्ज किया जाए।

3- पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज करने से रोकने को सरकारी काम में बाधा की तरह देखा जाए।

4- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामलों की पहले स्पेशल सेल के तहत जांच की जाए, मामले की पुष्टि होने पर ही केस दर्ज किया जाए।

5-पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामले की जांच के लिये कम से कम वरिष्ठ राज्य पुलिस सेवा या आईपीएस स्तर के अधिकारी द्वारा जांच हो।

6- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी पर झूठा मामला दर्ज किया जाता है और उसकी पुष्टि होती है तो झूठा मुकदमा करने वालों के खिलाफ आजीवन कारावास और अधिकतम जुर्माने का प्रावधान हो।

7- पत्रकार/मीडियाकर्मी की हत्या को रेयरेस्ट क्राइम के अंतर्गत रखा जाए। साथ ही एसआईटी गठित कर जांच कराई जाए।

8-पत्रकार/मीडियाकर्मी की कवरेज के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर नि:शुल्क बीमा प्रदान किया जाए।

9-कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी का इलाज सरकारी अथवा निजीअस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

10-यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी के परिजनो पर रंजिशन हमला किया जाता है तो उनका इलाज सरकारी और निजी अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

11- कवरेज के दौरान अथवा किसी मिशन पर काम करते हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।

12- पत्रकार/मीडियाकर्मी को आत्म सुरक्षा हेतु बंदूक  का लाइसेंस वरीय प्राथमिकता देते हुए इश्यू किया जाए।

13- सभी पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज के लिये राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए।

14- प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य हो।

15-सभी पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज हेतु आवागमन के लिये आधे किराये का प्रावधान हो, तथा रेलवे में यात्रा के लिये शीघ्र आरक्षण का प्रावधान हो।

16- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये टोल टैक्स में छूट प्रदान की जाए।

17- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी को धमकियां मिले तो उसकी सुनवाई शीघ्र हो तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

👉 सामाजिक सुरक्षा हेतु संस्तुतियां

1-राज्य एवं केन्द्र के स्तर पर “पत्रकार आर्थिक सुरक्षा निधि” योजना का संचालन हो।

2- 10,00000 का नि:शुल्क बीमा सुनिश्चित हो।

3- गम्भीर बीमारी की स्थिति में अच्छे अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित हो।

4- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना हो।

5- जिस तरह किसान ऋण योजना है उसी प्रकार पत्रकार/मीडियाकर्मियो हेतु ऋण योजना बैंको द्वारा संचालित हो।

6- पत्रकार/मीडियाकर्मियों हेतु कार्यालय योजना हो जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर कार्यालय उपलब्ध हों।

7- प्रिंटिंग प्रेस लगाने हेतु विशेष पैकेज व्यवस्था हो तथा प्रिंटिंग प्रेस पर आयात शुल्क में रियायत हो।

8- पत्रकार/मीडियाकर्मियों के बच्चों के लिये अच्छे शिक्षण संस्थानों में कोटा तय हो अथवा उनकी फीस में रियायत हो।

9- पत्रकार/मीडियाकर्मी हेतु आवास योजना हो, जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर आवास उपलब्ध हों।

जब तक लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकार/मीडियाकर्मी की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक किस तरह एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है और किस तरह भारत विश्व में निष्पक्ष भयहीन और स्वतंत्र मीडिया होने का दम्भ भर सकता है।
इसलिए जल्द से जल्द केंद्र सरकार द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाये।

लवलेश पांडेय संपादक चर्चा आज की दैनिक

Paliwal Menariya Samaj Gaurav