तिरंगे का मान - Paliwalwani

तिरंगे का मान

Paliwalwani Newspaper

बजार से सोना, चाँदी, कास्य क्रय कर सकते है,
मगर रियो-16 में जीतकर इन्हे जो प्राप्त कर सकते है।
अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस सब धातु जीत गये,
भारतीय खिालाडी अपने हुनर से हार कर भी जीत गये।
हम निराश कभी होतेे नही, खेल के मैदान में,
रास्ता बना ही लेते सागर के तुफान में।
हमारे देश की बेटियांे ने तिंरगे का मना रखा,
कुश्ती के कौशल में, बैडबिंटन की कला में,
साक्षी-सिंधु ने पदक भारत की झोली में रखा।
अभी आशा है, आगे और तम्गे जितेगें,
खेल भावना से हर खिलाडी पीछे नही हटेगें।
तिरंगा ऊँचा रहे, यह सबको भान है,
खेल-खेल है, इसे सहजता से खेलना ही हमारी शान है।
जब दो खेलते है तो एक की जय दुजे की पराजय होती है,
जब विश्वास की कश्ती चलती ‘‘जलेन्द्र’’ झंझावतों को पीछेे छोड देती है।

--प्रेषक--
बालकृष्ण खेमराज जी बागोरा (ग्राम. आमेट ) ‘‘जलेन्द्र’’
पालीवाल वाणी-संस्थापक, इंदौर
07389264545
Tags: Balkrishan Bagora, Hindi Poems, Petriotic Poems, Rio 2016, India, poem, shakshi, sindhu, रियो, भारतीय खिालाडी, देश की बेटियो, तिंरगे, सिंधु, जलेन्द्र

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