"यास" पुरुस्कार - Paliwalwani

"यास" पुरुस्कार

Paliwalwani Newspaper

खून पसीने के बल पर जो पुरुस्कार को पता है,
कीमत बही समझता उसकी वह कभी नहीं लौटता हैं|
चाटुकारिता के बल पर जो पुरुस्कार पा जात्ते हैं,
खुलती हैं पोल जगत मैं जब तव वापस दे जाते हैं|
है शक्ति अगर सच लिखने की क्यों लिखकर नही दिखाते हो,
हो सच्चे सपूत माँ वाणी के तो क्यों पुरुस्कार ठुकराते होते हो|
जो होते है सीमा पर शहीद क्या वो परमवीर लौटते है,
वो करते है सम्मान सदा उसका वे सच्चे सपूत कहलाते है|
पुरुस्कार की कीमत को तुम जिस दिन पहचानोगे,
यास भूल विकत होगी जीवन की उस दिन तुम जानोगे|
पूंजी केबल पर पाया था अब क्यों उसको लौटते हो,
तव क्यों हक़ तुमने छीना था अब झूठा एमन दिखाते हो|
हैं धिक्कार बुम्हे कुछ शर्म करो तुम्हे लाज तनिक न आयी है,
बनते हो वाणी पुत्र स्वयं तुमने सब इज्जत धूल मिलाई है|
तुम करो घोषणा सरे आम अब हम और नहीं लौटायेंगे,
थी यह जीवन की बड़ी भूल अब हम और नहीं दोहराएँगे ||

Devdutt Paliwal - Paliwalwani

देवदत्त पालीवाल(निर्भय)

9448417578

Tags: Devdutt Paliwal, Poems, Hindi Litrature, यास, पुरुस्कार, देवदत्त पालीवाल, निर्भय, माँ, कीमत

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