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शौर्य पर्व जमराबिज की तैयारियाँ अंतिम दौर में-कल मेणार खेली जाएगी बारूद्व की होली

Durgesh Menariya     Category: उदयपुर     24 Mar 2016 (11:59 PM)

उदयपुर (राज.)। उदयपुर जिले के वल्लभनगर तहसील के अंतर्गत ग्राम मेणार में खेली जाने वाली बारूद्व की होली का इतिहास काफी वर्षों पूर्व पुराना है। होली के दुसरे दिन मनाये जाने वाला त्यौहार पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्व ही नहीं अपितु लोकप्रिय भी है। जमराब्रिज को देखने के लिए समाज के कई युवा साथी काफी दिनों से तैयारियां कर रहे थे और वरिष्ठजनों की देखरेख में मनाया जाने वाला पर्व ऐतिहासिक होगा।

मेणार मे ऐतिहासिक जमराबिज

मेनारिया समाज के सबसे बडे ग्राम मेणार मे ऐतिहासिक जमराबिज मनाते है। कहा ओर माना जाता है कि चार सौ सालों (400) से यह परम्परा चलती आ रही है। यहा पर मेनारिया समाज के लोग बड़ी धुम-धाम के साथ बडे हर्षोल्लास के साथ शोर्य पर्व जमराबिज मनाया जायेगा। जहां रंगो की जगह पर बारूद्व की होली खेलते है। सब एकजुट होकर अपने मेणार के साथ-साथ मेनारिया समाज का भी मान सम्मान बढ़ाते है। आयोजन यहां परम्परा मेनारिया समाज की आन-बान-शान के साथ एकता का प्रतिक है। इस आयोजन के प्रति मेनारिया ब्राह्मण समाज, वरिष्ठ समाजसेवी, राजनेता, पत्रकार साथी, व्यापारीबंधु, युवा कार्यकर्ता के साथ मेनारिया युवा मोर्चा आयोजन में पधारे सभी स्नेहीजनों ओर समाजबंधुओं के साथ अतिथियों का स्वागत, सम्मान बडे आदर भाव से करते है। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी कल 25 मार्च शुक्रवार को मनाये जाने वाले त्यौहार की जबरी गेर के साथ जमराबिज की तैयारियाँ अंतिम दौर में पहुंच गई।

ढोल की ताप पर तलवार बाजी

ग्राम मेणार के मध्य औंकोरेश्वर चौपाटी (चबुतरा) पर ढोल की ताप पर तलवारों से खेली जाने वाली गेर के पुर्व अभ्यास की चालु हो चुका है। मेनारिया ब्राह्मणों द्वारा मुगलों पर विजय की खुशी में मनाया जाने वाला यह त्योहार देशभर में लोकप्रिय है कई राज्यों से समाज बंधु के अलावा अन्य ग्रामीण जन भी आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते है। यह त्योहार होली के दुसरे दिन रात्रि 9 बजे से शुरु होता है जो भोर सुबह आनंद उत्साह के साथ तक चलता रहता है। परम्परानुसार दिन में औंकोरेश्वर चौपाल पर सभी पंच महाराणा द्वारा भेंट की गई लाल जाजम पर विराजमान होते है और अम्ल की रस्म अदा की जाती है।

आयोजन के दो दिन पूर्व जमराबिज का बखान शुरू

होली महोत्सव पर्व से दो दिन पहले ही रणबाँकुरे ढोल की कतारबद्व मधुर ध्वनी से चारो दिशाओं मे मेनार जमराबिज के इतिहास का बखान करना शुरु कर देती है। होली के दुसरे दिन मनाये जाने वाले इस त्योहार को मेणार जमराबिज कहा जाता है लेकीन देशभर में यह त्योहार बारुद्व की होली के नाम से विख्यात है।

नंगी तलवारों के साथ गैर का आनंद

मेवाड़ी पारंमपरिक वेशभूषा मे लोग तैयार होकर हाथांे में बंदुके व तलवारें लेकर पांचों रास्तों से कुच करते हुए औकारेश्वर चौपाटी की ओर आगे बढ़ते है कलाकार और ग्रामीण जन कलात्मक भव्य युद्ध का प्रदर्शन करते हुए जीत के गान करते हुए जश्न मनाते है।

महिलाओं का करते है सम्मान

आयोजन की शुरूवात से लेकर खेल समाप्ती तक मेनारवासी महिलाओं का सम्मान करते हुए बाद में होली की आग पानी से बुझाकर युद्ध खत्म करने का ऐलान करते ही पुरा वातावरण सुगंधित धरा ओर आंसू की पवित्रता में बदल जाता है।

इतिहास वाचन के बाद जबरी गैर

जमरा घाटी पर इतिहास के वाचन के बाद पुनः औकारेश्वर चौपाटी (चतुबरे) पर पहुंचकर तलवारों से जबरी गैर खेली जाती है। इस वर्ष यह त्योहार होली के दुसरे कल 25 मार्च शुक्रवार रात्रि 9 बजे से को मनाया जायेगा।

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