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काका ने भतीजों को बनाया गोताखोर चैम्पियन...आगे कई उम्मीदें

Sunil paliwal     Category: इंदौर     13 Feb 2017 (1:36 AM)

इंदौर। नखराला भैरूनाथ जी के असीम कृपा से कहते है कि जब ठान लौ तो दुनिया भी छोटी दिखने लगती है, वैसे ही पालीवाल ब्राह्मण समाज के युवा साथी श्री मनीष जोशी ने काफी प्रयास करके अपने भतीजों को मध्यप्रदेश शासन की ओर से राज्यपाल ने विश्वमित्र अवार्डी श्री रमेश व्यास (सर) के कुशल हाथों में सौंपकर सपनों के ख्याबों में तैराक बनाने को लालयित रहने वालों को सर ने हकीकत में उड़ना सिखाया... उन्हीं के प्रयत्नों से आज समाज की कई प्रतिभा शिखर पर पहुंच चुकी है...ओर कई प्रतिभा अभी प्रयत्नशील है...श्री मनीष जोशी अभी युवा है... उन्होंने अपने नन्हें-नन्हें भतीजे श्री उत्कर्ष जोशी, श्री प्रखर जोशी को गोताखोर की ऐसी लगन लगाई की हकीकत समाने आ रही है... जहां श्री मनीष जोशी को इस काम के लिए धर्मपत्नी का हर पल साथ मिला... तो घर के हर परिवार ने मनीष का हौंसला बढ़ाया... ठंड या बरसात हो या फिर गर्मी ही क्यों ना हो... मनीष हर बार आग में तप कर अपने भतीजों को गोताखोर में डुबकी तब तक लगवता रहा जब तक उसके नन्हें-नन्हें भतीजे श्री उत्कर्ष जोशी, श्री प्रखर जोशी को कोच श्री रमेश व्यास (सर) ने चैम्पियन नहीं बना दिया तब तक प्रयास करते रहे... लगन, मेहनत ओर श्री चारभुजा की कृपा... नन्हें-नन्हें भतीजे श्री उत्कर्ष जोशी, श्री प्रखर जोशी दोनों ने राष्ट्रीय स्पार्धा में चांदी ओर कांसे के मेडल जीतकर पालीवाल समाज, राष्ट्रीय तैराक श्री रमेश व्यास(सर), काका मनीष जोशी के परिजनों को कई सौगात दिला दी। अब दोनों बच्चे इस वर्ष जूनियर स्पर्धाओं में भाग लेगें... वही राष्ट्रीय तैराक श्री रमेश व्यास(सर) ने पालीवाल वाणी बताया कि दोनों बच्चों में काफी हुनर है... ऐसे बच्चों को सिखाने में मजा आता है... जो देश ओर समाज के लिए अपना सबकुछ भूल कर केवल राष्ट्र के प्रति श्रद्वा रखते है... दिन रात केवल तैराक में गोता लगाकर... सोना जीतने का सपना देखना... हकीकत ही बयां करता है... संभावना है कि दोनो नौनिहाल बच्चे पदक जीतने के लिए भरभूर कोशिश प्रेक्ट्रिस करके पदक पर निशाना सधाने का प्रयास जरूर करेगें... राष्ट्रीय तैराक श्री रमेश व्यास(सर), मनीष जोशी ने पालीवाल वाणी को बताया कि दोनों बच्चों ने अपने आप को काफी अच्छा गोताखोर साबित किया है यह हर्ष की बात है... श्री व्यास जी ने संभावना जताई है कि श्री भैरूनाथ की कृपा ओर अगर नौनिहाल बच्चों ने अपना मन ओर कहीं नहीं भटकाया तो निश्चत रूप से दोनों बच्चे इंदौर की शान बनेगे... इंदौर का नाम देश- विदेश में चमकाने का हुनर रखते है... राष्ट्रीय तैराक श्री रमेश व्यास ने कहा कि दोनोे बच्चों के काका के नाम से प्रसिद्व श्री मनीष जोशी की हिम्मत की दाद देना चाहिए...उन्हीं के आर्थिक प्रयासों के कारण आज दोनों बच्चे शहर में धूम मचाने को आतुर है।

मनीष का सपना साकार...

कहते है कि सपना देखो तो पूरा देखो... ख्याब टुट जाए... फिर भी सपना देखो... सपना देखना हकीकत में ऊंचाई तक उड़ान भरना सिखाता हैं। श्री मनीष जोशी ने समाज के ही सर श्री रमेश व्यास से संपर्क कर भतीजों को तैराक बनाने की बात कहीं सर ने भी हां भर दी... इस शर्त पर कि... मेरी कोचिंग में नियम-कायदें कड़े है में किसी पर भी प्रकार की रहम नहीं करता हुं... काम के प्रति काम...ओर स्नेह की जगह भरभूर स्नेह प्यार करता हुं...जरा सी भी लापरवाही दिखी तो उन्हें कड़ी मेहनत करने की सजा भी देता हुं। फिर चाहे कोई भी... मनीष भी कहा हार मनाने वाले थे... उन्होंने पक्का इरादा कर लिया अपने भतीजों के लिए... अगले ही दिन सर के पास नन्हें-नन्हें भतीजे श्री उत्कर्ष जोशी, श्री प्रखर जोशी को सौंपकर अपने काम में लग गए।

पानी में से सोना निकलना है...

कड़ी मेहनत से सन 1995 से 2003 तक गोताखोरी की ओर राज्य स्पर्धाओं में कई पदक जीतने के बाद भी राष्ट्रीय स्पर्धा में चैथे क्रम तक आए... 2008 में नेशनल मास्टर्स के गोल्ड मेडलिस्ट है... ओर हाई बोर्ड के गोताखोर थे। वर्ष 2013 की स्कूलों में गर्मीयों की छुट्टियां पड़ी... उत्कर्ष ओर प्रखर को मनीष तैराकी सिखाने के लिए नेहरू पार्क स्विमिंग पूल लाए तो कोंचिंग के सर श्री रमेश व्यास की निगाह बच्चों पर पड़ी...उन्होंने तपाक से कहा पानी में पदक निकाल सकता है... इस बीच उत्कर्ष ने कहां हां... फिर क्या था धीरे... धीरे गोताखोरी सिखता गया...स्पर्धाओं का सिलसिला चला कभी निराशा तो कभी चहेरे पर हंसी के बीच राज्य स्पर्धाओं में पदक लाने की होड़ मचती रही... वैसे... वैसे कोचिंग के सर की पहली पं्रशान बन गए... कहते है कि मनीष अपने दोस्तों पर विशेष कृपा करते है, उनकी कहीं हुई बाते यकीन में बदल जाती है... आज मनीष जोशी का संयुक्त परिवार 106 डी सुदामा नगर इंदौर में रहता है...दोनों बच्चों के वरिष्ठजनों के साथ माट्साब के नाम से प्रसिद्व समाजसेवी, दादाजी श्री मोहनलाल जोशी (गांव.आमली), पालीवाल समाज 44 श्रेणी इंदौर के कोषमंत्री, नानाजी श्री रेवाशंकर पुरोहित (गांव. धांयला) बच्चों के पिताश्री कैलाश जोशी का असीम आशीर्वाद से बच्चे प्रगति कर रहे है...जहां सभी लोग मनीष को काका के नाम से संबोधित करते है, मनीष को भी नहीं मालूम है कि मुझे सभी लोग प्यार से काका क्यों कहते है।

नोनिहालों को अपनी कोचिंग से...

भैरूनाथ जी की असीम कृपा से मध्यप्रदेश शासन की ओर से राज्यपाल ने विश्वमित्र अवार्ड से सम्मानित श्री रमेश व्यास (सर) अपनी श्रेष्ठ कोचिंग से हीरे तराशकर देश को अनगित श्रेष्ठ गोताखोर देने वाले बिराले ही होते है... लगभग 45 वर्षों से नेहरू पार्क स्थित स्वीमिंग पूल में...सैकड़ों नौनिहालों को अपनी कोचिंग से... तराशने का काम दिन-रात कर श्रेष्ठ गोताखोर देश को समर्पित कर रहे है... तैराकी को फिटनेस के तौर पर अपनाया... उन्होंने तैराकी में ही अपना जीवन समर्पित कर दिया उन्होंने नौनिहालों के कॅरियर बनाने का मन बनाया... इस दौरान श्री व्यास ने शहर-देश, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झंडा बुलंद किया... होनहार कोच ने अपनी कोचिंग के बल पर मां अहिल्या की नगरी में बालक-बालिकाओं को ट्रेनिंग देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर गोताखोर तैयार कर रहे है... इसी कड़ी में कोच श्री रमेश व्यास अपने गोताखोर शिष्य श्री उत्कर्ष जोशी ओर श्री प्रखर जोशी से कड़ी मेहनत कराकरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने का लक्ष्य दिया है, दोनो नौनिहालों ने अपने काका श्री मनीष जोशी को निराश नहीं करने का मन में पक्का इरादा कर लिया... इसलिए दोनों बच्चें भी कड़ी मेहनत कर पदक की दौड़ में लग हुए है। दोनो नौनिहालों के लिए पालीवाल वाणी समूह, पालीवाल बजरंग मंडल, मां सर्वशक्ति सेवा मंड़ल बिजसान, काका ग्रुप, पालीवाल समाज अध्यक्ष सर्वश्री भुरालाल व्यास, कोषमंत्री रेवाशंकर पुरोहित, गोपीलाल व्यास, श्याम दवे, पुरूषोत्तम बागोरा, मुकेश जोशी, पूर्णाशंकर पुरोहित, शिव जोशी, आरके जोशी, पवन दवे, रमेश बागोरा, मनोज बागोरा, अनील बागोरा, सुनील पालीवाल, भेरू बागोरा, हीरा दवे, मुकेश जोशी, आयुष जोशी, महेश जोशी, तपन व्यास, जयेश जोशी, जयेश व्यास मंयक बागोरा, राजेश बागोरा, गोपाल दवे, घनश्याम दवे, संदीप पुरोहित, कैलाश पुरोहित, आदि दुआ कर रहे कि दोनों बच्चे पदक जीतकर पालीवाल समाज ओर मां अहिल्या की नगरी इंदौर का नाम जरूर गौरान्वित करें।

निराशा भी हाथ लगी पर हार नहीं मानी...

दोनो नौनिहालों को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में श्री उत्कर्ष जोशी ओर श्री प्रखर जोशी का चयन हो गया था ओर आॅस्टेªलिया खेलने जाना था पर किसी कारणवंश पासपोर्ट बनाने में एक दिन की देरी हो गई... इस कारण मन में गहरी निराशा लिए बच्चे उदास तो हुए ही घर-परिवार वाले भी काफी उदास हो गए... ऐसे समय में कोच श्री रमेश व्यास (सर) ने विश्वास जताया कि जो भी होता है अच्छा होता भैरूनाथ जी की कृपा से ओर बेहतर होगा। बस फिर क्या था दोनों बच्चे गोताखोर में बेहतर कर रहे है इसी उम्मीद के साथ कि एक दिन पदक अपनी झोली में होगा।

पालीवाल वाणी-सुनील पालीवाल
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