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1516 दिन में सनसनीखेज पालीवाल तिहरे हत्याकांड में मिला इंसाफ

पालीवाल वाणी ब्यूर     Category: इंदौर     02 Sep 2015 (8:10 AM)

इंदौर (म.प्र.)। चार साल पहले 6 जुलाई 2011 को मरीमाता चैराहे पर हुए तिहरे हत्याकांड में एक महिला सहित चार आरोपियों को देवास कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस की सुनवाई देवास जिला कोर्ट में हुई। 31 जुलाई 2015 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सरिता सिंह ने फैसला सुनाया। 

देवास कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसमें आरोपी सुरेंद्र, उसके दो भाई चंद्रमोहन व राजेश और पत्नी श्रीमती रेखाबाई सुरेंद्र शामिल हैं। पांचवें आरोपी नौकर शंकर को निर्दोष घोषित कर दिया । सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस की सुनवाई देवास जिला कोर्ट में हुई। 31 अगस्त 2015 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सरिता सिंह ने सुबह 12.15 मिनिट पर जहां नौकर श्री शंकर शर्मा को निर्दोष घोषित कर दिया वही लंच बाद बाकी आरोपियों को सजा के लिए दोपहर 2 बजे के बाद फैसला सुनाया। जहां दोषी परिजनों के आंखों में आंसू रूक नहीं रह थे। वही पीड़ित परिजनों को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सब एक दुसरे को बधाई दे रहे थे वही अपने रिस्तेदारों को लगातार मोबाईल पर पल पल की खबर भी सुना रहे थे।

यह है मामला
शासकीय अभिभाषक श्री रवींद्रसिंह गौड़ व एडवोकेट श्री प्रवीण दवे ने पालीवाल वाणी को बताया कि बाणगंगा थाना क्षेत्र के अंतगर्त मरीमाता चैराहे पर वकील वीरेंद्र बिहारीलाल पुरोहित की मिठाई दुकान थी। उसी के पास सुरेंद्र त्रिपाठी की सुरेंद्र बुक सेंटर नाम से दुकान थी। वीरेंद्र की दुकान का पानी सुरेंद्र की दुकान में जाता था। इसे लेकर दोनों पक्षों में अक्सर विवाद होता था। 6 जुलाई 2011 को बुक सेंटर के मालिक सुरेंद्र उर्फ रामबाबू पिता कृष्णचंद्र त्रिपाठी, उसके दो भाइयों चंद्रमोहन व राजेश उर्फ ब्रजेंद्र, सुरेंद्र की पत्नी श्रीमती रेखाबाई ़ि़त्रपाठी, नौकर शंकर शर्मा ने चाकू, वाइपर और दूध की तपेली से वीरेंद्र (50), भानजे हिमांशु लोकेंद्र जोशी (23) और पीयूष रमेशचंद्र दवे (25) पर हमला कर दिया। इसमें वीरेंद्र और पीयूष की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि हिमांशु जोशी ने 7 जुलाई 11 एमवाय हास्पिटल में इलाज के दौरान दम तौड़ दिया था। मौत से पहले हिमांशु ने बयान भी दर्ज करा दिए थे। पहले केस इंदौर जिला कोर्ट में चला। आठ चश्मदीदों की गवाही हुई। इसी बीच आरोपी पक्ष के वकीलों ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर केस अन्यत्र ट्रांसफर करने की मांग की। इसकी वजह बताई कि मृतक वीरेंद्र अधिवक्ता थे, इसलिए स्थानीय वकील केस चलाने में सहयोग नहीं कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की शरण ली तो केस देवास कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। मामले में 29 गवाह पेश किए गए। खास बात यह रही कि सभी गवाहों ने अभियोजन के तर्कों का समर्थन किया। केस में छठा आरोपी नाबालिग था, जिसका केस अलग चल चुका है। एक आरोपी शंकर शर्मा दोषमुक्त हुआ है, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में पीड़ित परिवार द्वारा अपील की जाएगी।

आरोपियों की आंखों में पछतावा झलका
6 जुलाई 2011 के बाद चार सालों से न्याय की राह में आरोपी सुरेंद्र, उसके दो भाई चंद्रमोहन व राजेश और पत्नी श्रीमती रेखाबाई सुरेंद्र त्रिपाठी, शंकर शर्मा की आंखों में पछतावे के आंसू गिर रहे थें। जब आरोपियों को देवास कोर्ट में पेश किया तब उनकी नजरे झुकी हुई और आंसू से पटी हुई थी। सबसे ज्यादा आंसू श्रीमती रेखा के निकल रहे थे। जब नौकर को निर्दोष घोषित किया और लंच के बाद बचे हुए 4 आरोपियों को सजा सुनाई तो रेखा तो रो-रोकर अपना बुरा हाल बना लिया वही उनसे मिलने आई बुर्जूग महिला भी रो पड़ी जब उन्होंने सुना कि सभी को आजीवन कारावास की सजा हो गई तो वो घबरा गई तब दो महिलाओं ने सहारा दिया।

नौकर कैसे छुटा
पीड़ित परिजन बार-बार यह कयास लगा रहे थे कि नौकर शंकर शर्मा को कैसे बरी कर दिया। हिमांशु के चाचा श्री प्रमोद जोशी, मुकेश जोशी अपने वकीलों से पुछते रहे कि कौन से ऐसे बिंदु रहे जो सजा बज गया। वकीलों से चर्चा करते रहे कि हम नौकर शंकर शर्मा को भी नहीं छोड़गे और हायकोर्ट में दावा लगाकर इंसाफ की गुहार लगायेगें।


न्याय की आस में सात लोग चल बसे
चार साल से न्याय की राह देखते-देखते वकील वीरेंद्र पुरोहित के परिवार के सात लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी नृशंस हत्याकांड से सदमे थे। तीनों मृतक वीरेंद्र पुरोहित, पीयूष दवे व हिमांशु जोशी अपने-अपने परिवार में इकलौते पुत्र थे। इस सनसनीखेज हत्याकांड में तीनों मृतकों के परिजन गहरे सदमे में थे, किंतु वकील पुरोहित के परिजन इतने आहत थे कि वे सदमा सहन नहीं कर पा रहे थे। वे हर बार यही कहते थे कि आरोपियों को कब सजा मिलेगी। हत्याकांड के बाद मृतक एडवोकेट वीरेंद्र पुरोहित के पिता श्री बिहारीलाल पुरोहित (गुडला) बेटे के सदमे से काफी दिनों तक गंभीर बीमार रहने के बाद उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद विरेन्द्र की माताजी श्रीमती शांताबाई बिहारीलाल पुरोहित ज्यादा दिनों तक सदमा नहीं सह सकी ओर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। उसके कुछ माह बाद वीरेंद्र पुरोहित की काकीजी श्रीमती कावेरी बाई पुरोहित का श्रीजी चरण हो गया। फिर काका श्री भूरालाल पुरोहित ओर उसके बाद उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भागवंती बाई पुरोहित का श्रीजी चरण हो गया। उसके बाद वीरेंद्र पुरोहित का भतीजा श्री पंकज पुरोहित का श्रीजी चरण हो गया। पुरोहित परिवार पर यमराज का साया मंडराता रहा इसी बीच वीरेंद्र की साली निर्मला दवे का भी श्रीजी चरण हो गया। इस तरह एक-एक करके पुरोहित परिवार के सात लोग 4 सालों में चल बसे। पालीवाल वाणी के संवाददाता को भी पुरोहित परिवार के लोंगो ने बताया था कि हादसे के बाद से ही सब सदमे में थे। ओर हर बार चिंता सता रही थी कि कब तक हमें न्याय मिलेगा। अब फैसला आ गया तो उनके चेहरे पर वो खुश नजर नहीं आई जो आना थी।


बेटे के जन्मदिन पर मिठाई लेने पहुंचे थे
6 जुलाई 2011 को पीयूष रमेशचंद्र दवे निवासी द्वारकाधीश कॉलोनी बेटे के जन्मदिन के लिए मिठाई लेने मामा श्री वीरेंद्र पुरोहित की मरीमाता स्थित मिठाई की दुकान पर पहुंचे थे। पीयूष दवे के साथ वीरेंद्र पुरोहित का दूसरा भानजा हिमांशु जोशी निवासी सुभाष चैक भी था। इसी दौरान त्रिपाठी परिवार ने वीरेंद्र पुरोहित पर हमला कर दिया। बीच बचाव करने पर पीयूष दवे और हिमांशु जोशी पर भी जानलेवा हमला बोल दिया था। जिसके चलते पालीवाल तिहारे हत्याकांड का सनसनीखेज मामला बना।


परिजन ने विधवा की करवाई शादी
हत्याकांड में मृतक हिमांशु जोशी के चाचा श्री प्रमोद जोशी ने पालीवाल वाणी को बताया कि  उसकी शादी के डेढ़ साल ही हुए थे। घटना के बाद उसकी पत्नी चेतना जोशी विधवा हो गई। लेकिन परिजनों ने गहन विचार-विमर्श के बाद उसका घर बसाने का निर्णय लिया और 22 अप्रैल 2015 को समाज के युवक से उसकी शादी कर दी। वो भी फैसले से जहां खुश नजर आई और राहत की सांस ली।

सदमें चली गई सात जान

स्व. वकील श्री विरेन्द्र पुरोहित के परिजनों ने सदमें एक के बाद एक ने जहां सात जनों ने दम तोड़ा वही पुरोहित परिवार में बचे हुए सदस्य आज भी गहरे सदमें नजर आएं। 6 जुलाई 2011 का हत्याकांड़ का मंझर आज भी दिखाई दे रहा है।
पिताजी - श्री बिहारीलाल पुरोहित (गुडला)
माताजी - श्रीमती शांताबाई बिहारीलाल पुरोहित
काकीजी - श्रीमती कावेरी बाई पुरोहित
काकाजी - श्री भूरालाल पुरोहित
काकीजी - श्रीमती भागवंती बाई पुरोहित
भतीजा - श्री पंकज पुरोहित
साली - निर्मला दवे


अभिभाषक गणों की मेहनत रंग लाई
सर्वश्री शासकीय अभिभाषक रविन्द्र गौड़, मोहन बागोरा, प्रवीण दवे, राकेश यादव, सुदीप नारोलिया, सचिन मानधन्या, जाफर कुरैशी, श्याम चैहान, भास्कर अग्रवाल, योगेश गुप्ता आदि का सहारनिया योगदान रहा।

आप भी देवास कोर्ट में मौजूद थे
सर्वश्री रामचंद्र दवे (कमांडर), पीएस 44 श्रेणी भवनमंत्री देवकिशन पुरोहित, वरिष्ठ अभिभाषक मोहन बागोरा, युवा अभिभाषक प्रवीण दवे, भेरूलाल जोशी (पहलवाल), दिनेश पुरोहित (राजा भैया), रमेश पुरोहित, रामचंद्र जोशी, मदन पुरोहित, लोकेन्द्र जोशी, प्रमोद जोशी, मुकेश जोशी, अशोक जोशी, राजु पुरोहित, प्रवेश पुरोहित, धनजंय अवस्थी, देवकिशन जोशी,कपिल दवे, लक्की दवे, शीतल व्यास, मनीष पुरोहित, पंकज जोशी, कृष्णकांत पुरोहित, मांगीलाल जोशी, अर्जून वर्मा, हेमन्त जैन, योगेश व्यास, दाउ जोशी, पालीवाल वाणी के संपादक सुनील पालीवाल, महेश जोशी, देवास से पंकज पालीवाल|

फोटो- कोर्ट का परिणाम सुनते वकील साहब

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