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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता का निधन

paliwalwani     Category: दिल्ली     05 Dec 2016 (10:32 PM)

नई दिल्ली/चेन्‍नई : तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के निधन की खबर आने के बाद सियासी गलियारे में चहलकदमी तेज हो गई है । इस खबर की पुष्टि अपोलो चेन्‍नई ने कर दी है। अपोलो के मुताबिक जयललिता ने रात करीब 11.30 बजे अखिरी सांस ली। जयललिता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके गहरा शोक प्रकट किया है। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के निधन पर पालीवाल वाणी समाचार पत्र समूह के संपादक सुनील पालीवाल की ओर सेे गहरा शोक प्रकट किया ।

जयललिता के बारें में जानें …

जयललिता जयराम (अन्ना द्रमुक) की की वर्तमान महासचिव तथा तमिलनाडु की मुख्यमंत्री है । उन्हें राज्य की दूसरी महिला मुख्‍यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हैं. पूर्व के दिनों में वे मुख्य रूप से तमिल फिल्मों की अभिनेत्री रही, किन्तु उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड और एक हिंदी तथा एक अँग्रेजी फिल्म में भी काम किया है ।

कन्नड,तमिल फिल्मों में काम करने लगीं

जब जयललिता स्कूल में पढ़ रही थीं तभी उन्होंने  एपिसल नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया। वे 15 वर्ष की आयु में कन्नड फिल्मों में मुख्‍य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी. इसके बाद वे तमिल फिल्मों में काम करने लगीं। वे दक्षिण भारत की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर फिल्मों में भूमिका निभाई. 1965 से 1972 के दौर में उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ की ।

1982 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की

फिल्मी करियर के बाद उन्होने एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ 1982 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की. उन्होंने 1984 से 1989 के दौरान तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया। वर्ष 1987 में रामचंद्रन का निधन के बाद उन्होने खुद को रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।  वे 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री हैं । राजनीति में उनके समर्थक उन्हें अम्मा (मां) और कभी कभी पुरातची तलाईवी क्रांतिकारी नेता कहकर बुलाते हैं ।

जयललिता तमिलनाडु की अम्मा क्यों थीं!

25 मार्च 1989 का दिन था. तमिलनाडु विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था. जैसे ही मुख्यमंत्री करुणानिधि ने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया कांग्रेस के सदस्य ने प्वाएंट ऑफ़ ऑर्डर उठाया कि पुलिस ने विपक्ष की नेता जयललिता के ख़िलाफ़ अप्रजातांत्रिक ढ़ंग से काम किया है । जयललिता ने भी उठ कर शिकायत की कि मुख्यमंत्री के उकसाने पर पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की है और उनके फ़ोन को टैप किया जा रहा है । स्पीकर ने कहा कि वो इस मुद्दे पर बहस की अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि बजट पेश किया जा रहा है ।

ये सुनना था कि विधानसभा सदस्य बेकाबू हो गए. एआईडीएमके के सदस्य चिल्लाते हुए सदन के वेल में पहुंच गए. एक सदस्य ने ग़ुस्से में करुणानिधि को धक्का देने की कोशिश की जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और उनका चश्मा ज़मीन पर गिर कर टूट गया । एक एआईडीएमके सदस्य ने बजट के पन्नों को फाड़ दिया । विधानसभा के अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया। जयललिता की जीवनी अम्मा जर्नी फ़्राम मूवी स्टार टु पॉलिटिकल क्वीन लिखने वाली वासंती बताती हैं, जैसे ही जयललिता सदन से निकलने के लिए तैयार हुईं, एक डीएमके सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि जयललिता भी ज़मीन पर गिर गईं ।

स्कूल के दिनों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्रा की शील्ड मिली

अभिनेत्री से राजनेता बनीं जयललिता के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि वो अभिनेत्री कतई नहीं बनना चाहती थीं. वो बहुत अच्छी छात्रा थीं। स्कूल के दिनों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्रा की शील्ड मिली और दसवीं कक्षा की परीक्षा में उन्हें पूरे तमिलनाडु में दूसरा स्थान मिला । अपनी दूसरी ही फ़िल्म में जयललिता को उस समय तमिल फ़िल्मों के चोटी के अभिनेता एमजी रामचंद्रन के साथ काम करने का मौका मिला। एमजीआर का जयललिता के प्रति शुरू से ही साफ़्ट कार्नर हो गया था।एक बार थार रेगिस्तान में शूटिंग के दौरान रेत इतना गर्म था कि जयललिता उस पर चल नहीं पा रही थी । तभी एमजीआर ने पीछे से आ कर उन्हें गोदी में उठा लिया था ताकि उनके पैर न जलेंएमजीआर और जयललिता के संबंधों में भी बहुत उतार चढ़ाव आए। उन्होंने उन्हें पार्टी के प्रोपेगेंडा सचिव के साथ साथ राज्यसभा का सदस्य भी बनाया. लेकिन पार्टी में जयललिता का इतना विरोध हुआ कि एमजीआर को उन्हें प्रोपेगेंडा सचिव के पद से हटाना पड़ा ।

जयललिता को उनके घर तक में नहीं घुसने दिया

इस बीच एमजीआर गंभीर रूप से बीमार हो गए ।जब उनका देहांत हुआ तो उनके परिवार वालों ने जयललिता को उनके घर तक में नहीं घुसने दिया।तभी अचानक जानकी के भतीजे दीपन ने उन पर हमला किया और उन्हें गन कैरेज से नीचे गिरा दिया. जयललिता ने तय किया कि वो एमजीआर की शव यात्रा में आगे नहीं भाग लेंगीं, वो अपनी कंटेसा कार में बैठीं और अपने घर वापस आ गईं ।

पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई

1992 के आम चुनाव में जयललिता ने पहली बार जीत दर्ज की और राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह ने उन्हें पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई.जयललिता अब तक चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं । अपने मज़बूत प्रशासन के लिए जहाँ उन्हें अक्सर वाहवाही मिली है, वहीं उन पर व्यक्ति पूजा और भृष्टाचार के आरोप भी लगे हैं.998 में उन्होंने वाजपेयी सरकार को समर्थन दिया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनकी करुणानिधि सरकार को बर्ख़ास्त करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया. सन 2002 में जब आधी रात को करुणानिधि को जगा कर गिरफ़्तार किया गया तो उन पर बदले की कार्रवाई करने का आरोप भी लगा ।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के निधन पर पालीवाल वाणी समाचार पत्र समूह के संपादक सुनील पालीवाल की ओर सेे गहरा शोक प्रकट किया ।

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