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अखबार एक खोज...डॉ अर्पण जैन-अविचल

paliwalwani news...✍️     Category: आपकी कलम     19 May 2019 7:07 PM

आप रोटरी पर छपने वाले अखबार और मोटी तनख्वाह पाने वाले शख्स से अब भी उम्मीद कर रहे हो...सम्पादकीय संस्थान बचे ही कहाँ है...! अखबार प्रोडक्ट ही नहीं बल्कि मुखपत्र ही बचा है...मुखपत्र कहुँ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी...केवल मालिक के लाभ-हानि पर चलने वाला मुखपत्र है, जिसमें मालिक की झाँकी हो यह मानसिकता शेष है...जब माँ ही चरित्र नहीं संभाल पा रही है तो बिटीयाँ को कैसे रोकेगी...! खैर...समय का चक्का है...बाजार से ज्यादा स्व हावी है अखबार पर...महज प्रोडक्ट ही रहता तो बेहतर था, किंतु अब मुखपत्र बन कर सिमट-सा जाना तकलीफदेह होने के साथ-साथ गैर जिम्मेदार भी है... अब तो लगता है सब बंद हो जाना चाहिए...।

● न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी...

संपादक नाम का प्राणी अब नहीं बचा...महज धन कुबेर मालिक के चित्रण और दर्शन के सिवा कुछ बाकी नहीं रहा...संपादक का स्वविवेक शून्य है...बस बचा तो यह है कि मालिक क्या चाहता है...गंभीरता खत्म...पहले अखबार में खोज थी, अब अखबार एक खोज है...खबर ही खोज का विषय है...पाठक एक खोज है...।

● मत पालिए उम्मीद...

हत्या हो चुकी उस चरित्र की, जो जनता की आवाज था, अब मालिक की आवाज बन कर अखबार के नाम पर धुर्तता परोसी जा रही है...न पाठक का विरोध है. न पत्रकार का...सर्कुलेशन, एड, पेड न्यूज ने विकल्प और विचारों की हत्या करके नया क्लेवर अर्पण कर दिया...जग में चिंता उससे लाभ की है न कि उससे जनमत की समस्याओं के समाधान की...न अखबार बचा, न सम्पादक
डॉ अर्पण जैन (अविचल)... ✍

परिचय : डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर  साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के 21 राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।
● पालीवाल वाणी ब्यूरो-
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